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पराग के बारे में: काबुल

काबुल में वसंत के एलर्जी सीजन (मार्च-मई) के दौरान पेड़ों के पराग कणों का दबदबा रहता है; बाग-ए-बाबर में शहतूत (Morus) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं; काबुल नदी के किनारे पॉपलर (Populus) और विलो (Salix) सामान्य रूप से मिलते हैं। शहर के पार्कों के चिनार (Platanus) के पेड़ भी इसमें योगदान देते हैं। गर्मियों (मई-जुलाई) में सिंचित क्षेत्रों और हरे-भरे स्थानों से निकलने वाले घास (Poaceae) के पराग कणों की अधिकता देखी जाती है। खराब या खुदी हुई मिट्टी वाली जगहों से बथुआ (Chenopodium) और चौलाई (Amaranthus) जैसी खरपतवार इसमें इजाफा करती हैं।

काबुल की घाटीनुमा बनावट और आसपास के पहाड़ पराग और धूल को एक जगह रोक सकते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर इनका उच्च जमाव हो जाता है। शुष्क परिस्थितियों और कच्ची सड़कों के कारण साल भर धूल (PM10) का स्तर बढ़ा रहता है। शरद और शीत ऋतु में सीलन भरी इमारतों और सड़ती हुई वनस्पतियों के कारण फफूंद (Alternaria, Cladosporium) के बीजाणुओं की संख्या बढ़ जाती है।

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पराग स्तरों का अर्थ
कम लक्षणों की संभावना कम
मध्य लक्षणों का मध्यम जोखिम
उच्च व्यापक लक्षण संभव
ब.उ. महत्वपूर्ण लक्षणों की उम्मीद करें
अ.उ. अत्यधिक उच्च लक्षण संभावना और गंभीरता