पराग गणना और पूर्वानुमान: Chandigarh
पराग के बारे में: Chandigarh
चंडीगढ़ में वसंत के एलर्जी सीजन (फरवरी-अप्रैल) के दौरान शहतूत और चिनार के पराग कणों का अत्यधिक प्रभाव रहता है; सफेद शहतूत (Morus alba) लीज़र वैली में प्रचुरता से पाया जाता है; चिनार (Populus) शिवालिक की पहाड़ियों के किनारे व्यापक रूप से फैला हुआ है। मानसून (जुलाई-सितंबर) के दौरान घास (Poaceae) का पराग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। गर्मियों में गाजर घास (Parthenium hysterophorus) का स्तर काफी बढ़ जाता है, जो मुख्य रूप से सुखना झील के किनारों और सेक्टर 16 से फैलती है।
शहर की चौड़ी सड़कें और ग्रिड लेआउट हवा के माध्यम से पराग को पूरे शहर में फैलने में मदद करते हैं। शिवालिक पर्वतमाला की निकटता के कारण हवा निचले इलाकों में ही रुक जाती है। मानसून की नमी के कारण रॉक गार्डन और कैपिटल कॉम्प्लेक्स के पास सड़ने वाले जैविक पदार्थों से फफूंद (Aspergillus, Penicillium) के बीजाणुओं (spores) की संख्या में भारी वृद्धि होती है।