पराग गणना और पूर्वानुमान: चेन्नई
पराग के बारे में: चेन्नई
चेन्नई में गर्मियों के दौरान एलर्जी के मौसम (मार्च-जून) में गाजर घास और नीम की प्रमुखता रहती है; खाली भूखंडों और कूवम नदी के किनारे गाजर घास (Parthenium hysterophorus) भारी मात्रा में पाई जाती है; वहीं गिंडी नेशनल पार्क में नीम (Azadirachta indica) व्यापक रूप से फैला हुआ है। मरीना बीच के साथ झाऊ (Casuarina equisetifolia) आम है; अड्यार नदी के तटों के पास साल भर दूब घास (Cynodon dactylon) का स्तर ऊंचा बना रहता है।
बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवा सूक्ष्म कणों को थाम लेती है; समुद्री हवाएं भीतरी इलाकों के एलर्जेंस को शहर के केंद्र की ओर धकेल देती हैं। मानसून के महीनों (अक्टूबर-दिसंबर) में फफूंद (Aspergillus, Penicillium) के बीजाणुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है, जो अरिनार अन्ना जूलॉजिकल पार्क की नम वनस्पतियों और जलभराव वाले शहरी वातावरण से उत्पन्न होते हैं।