पराग गणना और पूर्वानुमान: Goa
पराग के बारे में: Goa
गोवा के शुष्क मौसम (दिसंबर-मई) में पराग का स्तर काफी अधिक रहता है; सत्तारी और बिचोलिम की पहाड़ियों में काजू (Anacardium occidentale) बहुतायत में पाया जाता है; फोंडा के बगीचों में आम (Mangifera indica) व्यापक रूप से फैला हुआ है। मांडवी नदी के किनारे नारियल (Cocos nucifera) के पराग की निरंतर उपस्थिति रहती है। मानसून के महीनों (जून-सितंबर) के दौरान भगवान महावीर अभयारण्य और मोलेम नेशनल पार्क के पास घास (Poaceae) का स्तर बढ़ जाता है।
तटीय हवा की नमी और सहयाद्री की तलहटी एलर्जी पैदा करने वाले कणों को रोक लेते हैं; समुद्र की हवाएं पराग को अंदरूनी इलाकों में घने जंगलों की ओर ले जाती हैं। साल भर रहने वाली नमी के कारण फफूंद (Aspergillus, Penicillium) के बीजाणुओं (स्पोर्स) की संख्या बढ़ जाती है, जो बोंडला वन्यजीव अभयारण्य में सड़ते हुए पत्तों और भारी मानसूनी बारिश के कारण उत्पन्न होते हैं।