पराग गणना और पूर्वानुमान: कोलकाता
पराग के बारे में: कोलकाता
कोलकाता के शुष्क मौसम (फरवरी-अप्रैल) में पीली गुलमोहर और करंज के पराग कणों की प्रधानता रहती है; अलीपुर में पीली गुलमोहर (Peltophorum pterocarpum) प्रचुर मात्रा में पाई जाती है; साल्ट लेक की सड़कों और रास्तों पर करंज (Millettia pinnata) व्यापक रूप से फैला हुआ है। शहरी बंजर भूमि से निकलने वाली कांग्रेस घास (Parthenium hysterophorus) भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान देती है। मानसून के बाद (अक्टूबर-नवंबर) के समय मैदान और हुगली नदी के तटों से उत्पन्न होने वाले घास (Poaceae) के पराग का स्तर काफी बढ़ जाता है।
उत्तरी कोलकाता की संकरी गलियों में उच्च आर्द्रता और ठहरी हुई हवा प्रदूषकों और एलर्जी कारकों को सोख लेती है। मानसून के महीनों (जून-सितंबर) के दौरान, सीलन भरी पुरानी इमारतों और पूर्वी कोलकाता के आर्द्र क्षेत्रों (East Calcutta Wetlands) से फफूंद (Aspergillus, Penicillium) के बीजाणुओं (spores) की संख्या में वृद्धि देखी जाती है।