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पराग के बारे में: Pune

पुणे की शुष्क सर्दियों और गर्मियों के महीनों (अक्टूबर-मई) में गाजर घास और चिलबिल का दबदबा रहता है; गाजर घास (Parthenium hysterophorus) वेताल टेकरी और मुला-मुठा नदी के किनारों पर आम तौर पर पाई जाती है। चिलबिल (Holoptelea integrifolia) एम्प्रेस गार्डन और सावित्रीबाई फुले पुणे विद्यापीठ के पास व्यापक रूप से फैला हुआ है। मानसून के बाद के महीनों में घास (Poaceae) के पराग कणों का स्तर काफी बढ़ जाता है, जो पाषाण झील और पार्वती हिल से उत्पन्न होते हैं।

शहर को घेरने वाली पहाड़ियाँ एक ‘बाउल इफेक्ट’ (कटोरे जैसी स्थिति) पैदा करती हैं; यह भौगोलिक बनावट तापमान व्युत्क्रमण (temperature inversions) के दौरान पराग और प्रदूषकों को सोख लेती है। मानसून के मौसम (जून-सितंबर) में, इमारतों की नम दीवारों और सह्याद्रि की तलहटी में सड़ती हुई वनस्पतियों के कारण फफूंद (Aspergillus, Penicillium) की मात्रा अधिक हो जाती है।

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पराग स्तरों का अर्थ
कम लक्षणों की संभावना कम
मध्य लक्षणों का मध्यम जोखिम
उच्च व्यापक लक्षण संभव
ब.उ. महत्वपूर्ण लक्षणों की उम्मीद करें
अ.उ. अत्यधिक उच्च लक्षण संभावना और गंभीरता