पराग गणना और पूर्वानुमान: क्योटो
पराग के बारे में: क्योटो
क्योतो में वसंत ऋतु के दौरान एलर्जी का मौसम (फरवरी-मई) मुख्य रूप से देवदार और सरू के परागकणों से प्रभावित रहता है; जापानी देवदार (Cryptomeria japonica) कितायामा पर्वत श्रृंखला और अराशियामा में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है; जापानी सरू (Chamaecyparis obtusa) हिगाशियामा की पहाड़ियों में व्यापक रूप से फैला हुआ है। उत्तरी वन क्षेत्रों से जापानी बलूत (Quercus serrata) भी पराग के स्तर में महत्वपूर्ण योगदान देता है। गर्मियों (मई-अगस्त) में कामो और कत्सुरा नदी के किनारों से उत्पन्न होने वाली घास (Poaceae) के परागकणों का स्तर काफी ऊंचा रहता है।
शहर की बेसिन भौगोलिक संरचना चारों ओर फैली पर्वत श्रृंखलाओं के बीच हवा को रोक लेती है। शरद और शीत ऋतु में फफूंद (Alternaria, Cladosporium) के बीजाणुओं (spores) की संख्या बढ़ जाती है; ये बीजाणु नम मंदिर उद्यानों और लकड़ी की पुरानी संरचनाओं में सामान्य रूप से पाए जाते हैं। ग्योएन नेशनल गार्डन में पत्तियों के सड़ने से बनने वाला कूड़ा मौसमी बीजाणु स्तर को और बढ़ा देता है।