🌿

पराग के बारे में: त्रिपोली

त्रिपोली में वसंत के दौरान एलर्जी का मौसम (फरवरी-मई) मुख्य रूप से जैतून और सरू के पराग से प्रभावित रहता है; जैतून (Olea europaea) अबू सलीम और अल-नस्र के जंगलों में बहुतायत में पाया जाता है; सरू (Cupressus sempervirens) तटीय सड़कों के किनारे व्यापक रूप से फैला हुआ है। अल-मंशिया जिले से खजूर (Phoenix dactylifera) का पराग इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। गर्मी के मौसम (मई-सितंबर) में वादी अल-मजीनिन के किनारों से घास (Poaceae) के पराग का स्तर काफी बढ़ जाता है। मदीना की पुरानी दीवारों पर पेलिटोरी (Parietaria judaica) उगती है।

सहारा से आने वाले धूल भरे तूफान सूक्ष्म कणों को लेकर आते हैं; तटीय हवाएं नफूसा पहाड़ों के पास एलर्जेंस को रोक लेती हैं। त्रिपोली बंदरगाह और खजूर के बागों के पास के नम क्षेत्रों के कारण शरद और शीत ऋतु में फफूंद (Aspergillus, Penicillium) के बीजाणुओं की संख्या बढ़ जाती है।

अधिक जानकारी? ऐप डाउनलोड करें! व्यक्तिगत और समायोज्य सूचनाएं, अति-स्थानीय प्रति घंटा पूर्वानुमान, पराग मानचित्र
पराग स्तरों का अर्थ
कम लक्षणों की संभावना कम
मध्य लक्षणों का मध्यम जोखिम
उच्च व्यापक लक्षण संभव
ब.उ. महत्वपूर्ण लक्षणों की उम्मीद करें
अ.उ. अत्यधिक उच्च लक्षण संभावना और गंभीरता