🌿

पराग के बारे में: ताशकंद

ताशकंद में वसंत का एलर्जी सीजन (मार्च-मई) मुख्य रूप से पॉपलर और विलो के पराग से प्रभावित रहता है; अलीशेर नवोई नेशनल पार्क में पॉपलर (Populus) प्रचुर मात्रा में पाया जाता है; अनहोर नहर के किनारे विलो (Salix) व्यापक रूप से फैला हुआ है। जापानी गार्डन से बर्च (Betula) भी पराग के स्तर में महत्वपूर्ण योगदान देता है। गर्मियों (जून-अगस्त) के दौरान, चिरचिक नदी के तटों से उत्पन्न होने वाले घास (Poaceae) के पराग का स्तर काफी बढ़ जाता है।

चौड़ी सड़कें और क्षेत्रीय तापीय प्रतिलोमन (temperature inversions) पराग कणों को हवा में रोक सकते हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर इनकी सघनता बढ़ जाती है। शरद और शीत ऋतु में, सेंट्रल पार्क में गिरे हुए पत्तों और सालार नहर के पास के नमी वाले क्षेत्रों के कारण फफूंद (Alternaria, Cladosporium) के बीजाणुओं की संख्या में वृद्धि देखी जाती है।

अधिक जानकारी? ऐप डाउनलोड करें! व्यक्तिगत और समायोज्य सूचनाएं, अति-स्थानीय प्रति घंटा पूर्वानुमान, पराग मानचित्र
पराग स्तरों का अर्थ
कम लक्षणों की संभावना कम
मध्य लक्षणों का मध्यम जोखिम
उच्च व्यापक लक्षण संभव
ब.उ. महत्वपूर्ण लक्षणों की उम्मीद करें
अ.उ. अत्यधिक उच्च लक्षण संभावना और गंभीरता